Narada case: बंगाल सरकार ने कलकत्ता HC से कहा, खंडपीठ CBI की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Govt) ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court)  के समक्ष दावा किया कि कोई खंडपीठ सीबीआई (CBI) के उस आवेदन पर सुनवाई नहीं कर सकती, जिसमें नारद स्टिंग मामले को निचली अदालत से उसके समक्ष सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है. इसने साथ ही कहा कि एकल पीठ को इस पर सुनवाई करनी चाहिए.

नारद स्टिंग टेप मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों, एक विधायक और पूर्व महापौर को अंतरिम जमानत प्रदान करने को लेकर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी के बीच मतभेद के बाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले को पांच न्यायाधीशों की वृह्द पीठ के समक्ष भेजा था. यह भी पढ़े: Narada case: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तारी को लेकर TMC सांसद कल्याण बनर्जी के दावे पर जताई हैरानी, कही ये बात
राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने दलील दी कि स्थानांतरण संबंधी आवेदन की सुनवाई खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और इस पर एकल पीठ को सुनवाई करनी चाहिए.
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दत्ता की दलील पर आपत्ति जतायी और दावा किया कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि अदालत मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करे. पांच न्यायाधीशों की पीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी.

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Sero Survey: उत्तर प्रदेश में होगा सीरो सर्वे, 4 जून से लिए जाएंगे सैम्पल

लखनऊ: यूपी में कोरोना संक्रमण की गहन पड़ताल के लिए 4 जून से सीरो सर्वे (Sero Survey) शुरू किया जा रहा है। सभी 75 जिलों में होने वाले इस सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कोरोना का कितना संक्रमण फैला और आबादी का कितना हिस्सा संक्रमित हुआ. यही नहीं, इससे यह भी सामने आएगा कि कितने लोगों में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबाडी बन चुकी है. सोमवार को राज्य स्तरीय टीम-09 की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीरो सर्वे को लेकर हो रही तैयारियों की जानकारी ली.

अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद (Mohan Prasad) ने बताया कि 4 जून से शुरू हो रहे इस सर्वे को लेकर कार्ययोजना तैयार हो चुकी है। सैम्पलिंग कर लिंग और आयु सहित विभिन्न मानकों पर सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी. जिलेवार सर्वे करने वाले कार्मिकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके परिणाम जून के अंत तक आने को संभावना है. यह भी पढ़े: COVID-19: उत्तर प्रदेश में घट रही हैं हॉट स्पॉट और कंटेनमेंट जोन की संख्या

कोरोना की पहली लहर के दौरान पिछले साल सितंबर में 11 जिलों में सीरो सर्वे कराया गया था.यह सर्वे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, प्रयागराज, गाजियाबाद, मेरठ, कौशांबी, बागपत व मुरादाबाद में हुआ था. उस समय सीरो सर्वे में 22.1 फीसद लोगों में एंटीबाडी पाई गई थी.

देश की खबरें | अलीगढ़ शराब कांड : अब तक 36 लोगों की मौत की पुष्टि, पुलिस उपाधीक्षक, संयुक्त और उप-आबकारी आयुक्त निलंबित

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश), 31 मई जिले में जहरीली शराब पीने से 11 और लोगों की मौत के साथ इस घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन ने एक पुलिस उपाधीक्षक को निलंबित कर दिया और दो अन्य से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा आबकारी विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
दूसरी तरफ, पुलिस ने तीसरे दिन भी छापेमारी जारी रखी और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से शराब कारोबार में शामिल 10 और लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि आज 10 लोगों की गिरफ्तारी के साथ ही शुक्रवार से गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या तीस तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि अवैध शराब के धंधे में लिप्त पाए जाने वालों की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर भानु प्रताप कल्याणी ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा, “पिछले शुक्रवार को जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आने के बाद से सोमवार पूर्वाह्न तक कुल 71 शव पोस्टमॉर्टम के लिए लाए गए, जिनमें से 36 लोगों की मौत की वजह जहरीली शराब पीना है।’’
बाकी 35 शवों के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि इस बात का संदेह है कि उनकी मौत भी जहरीली शराब पीने से ही हुई हो, लेकिन जब तक उनके विसरा की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।
अपर मुख्‍य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने सोमवार की शाम बताया कि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने घटना में प्रथम दृष्टतया दोषी पाए गए पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध सख्‍त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
अवस्थी ने बताया कि अलीगढ़ जिले के पुलिस उपाधीक्षक (क्षेत्राधिकारी गभाना) कर्मवीर सिंह को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही किए जाने का निर्णय लिया गया है और इसके साथ ही क्षेत्राधिकारी (खैर) शिवप्रताप सिंह व क्षेत्राधिकारी (नगर तृतीय) विशाल चौधरी से घटना के संबंध में तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इससे पहले, अपर मुख्‍य सचिव, आबकारी संजय भूसरेड्डी ने सोमवार को बताया कि अलीगढ़ शराब प्रकरण में आबकारी विभाग के संयुक्त आबकारी आयुक्त (आगरा जोन) रविशंकर पाठक एवं उप-आबकारी आयुक्त, अलीगढ़ मंडल, ओपी सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
शासन स्‍तर से पाठक को निलंबित करने के बाद धीरज सिंह, संयुक्त आबकारी आयुक्त, लखनऊ को आगरा जोन का अतिरिक्त प्रभार और ओपी सिंह को निलंबित करते हुए विजय कुमार मिश्र, उप आबकारी आयुक्त, आगरा को अलीगढ़ मंडल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
भूसरेड्डी ने शुक्रवार को बताया था कि अलीगढ़ के जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा, संबंधित क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक राजेश कुमार यादव और चंद्रप्रकाश यादव, प्रधान आबकारी सिपाही अशोक कुमार, आबकारी सिपाही रामराज राना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी है।
इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने भी प्रभावित क्षेत्रों के दो थाना प्रभारियों और दो पुलिस निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है।
इस बीच, अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने स्थानीय प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन जहरीली शराब से मौतों के मामले में आबकारी विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और कुछ निर्दोष कारोबारियों को गलत ढंग से फंसा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि वह इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करेंगे।
जहरीली शराब से रविवार को ही 35 लोगों की मौत का दावा करने वाले सांसद ने कहा कि जिलाधिकारी इस कांड में मारे गए लोगों की पहचान करने और उनकी सूची बनाने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
गौतम ने कहा कि पुलिस को इस मामले की जांच में खुली छूट दी जानी चाहिए ताकि वास्तविक अपराधी पकड़े जा सकें और वह निर्दोष लोगों पर मुकदमा दर्ज कर ध्यान हटाने की किसी भी कोशिश का खुला विरोध करेंगे।
हालांकि जिलाधिकारी ने सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से गलत ठहराया।
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक जमीरउल्लाह खान ने सोमवार को 12 ऐसे लोगों के परिवारों को मीडिया के सामने पेश किया, जिनकी पिछले तीन दिनों के दौरान जहरीली शराब पीने से मौत हो गई और जिनका अंतिम संस्कार बिना किसी पोस्टमॉर्टम के दबाव में किया गया था।
बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने लोधा, रैत और सुजापुर गांवों के 12 मामलों के संबंध में जिलाधिकारी को भी पत्र लिखा था जिसमें पीड़ितों का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम के किया गया।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं जिनका पता जिले के प्रभावित गांवों का विस्तृत सर्वेक्षण करके ही लगाया जा सकता है।
उत्‍तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता प्रदीप माथुर ने रविवार को उन गांवों का दौरा किया, जहां से मौतों की सूचना मिली थी।
माथुर ने कहा, “हमने उन तीन गांवों का दौरा किया जहां से मौतों की सूचना मिली थी। स्थानीय प्रशासन तथ्यों को छिपा रहा है और मौतों की संख्या बहुत अधिक है।”
उन्होंने कहा, ”हमने मांग की है कि मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और गांव में एक घर दिया जाए। जिलाधिकारी को तुरंत स्थानांतरित किया जाना चाहिए क्योंकि वह मौत के तथ्यों को छिपा रहे हैं।”
माथुर ने राज्य सरकार पर शराब माफिया को ‘संरक्षण’ देने का भी आरोप लगाया।
सोमवार सुबह जिले के क्वारसी थाना क्षेत्र के चंदना इलाके में शराब पीने के बाद अचानक बीमार होने के तीन नए मामले सामने आए। तीनों ही लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस बीच, आगरा के मंडलायुक्त गौरव दयाल ने हालात को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और शराब माफिया के खिलाफ छापेमारी को पुरजोर तरीके से जारी रखने के निर्देश दिए।
रविवार को एक आधिकारिक प्रेस नोट में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया था कि शराब से मौत होना तभी माना जाएगा जब मजिस्ट्रेट मेडिकल जांच के आधार पर इसकी पुष्टि करेंगे।

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देश की खबरें | टीकाकरण का आडिट करवाएगी राजस्थान सरकार

जयपुर, 31 मई कोरोना वायरस प्रतिरक्षण टीकाकरण के तहत टीके की बर्बादी के आरोपों के बीच राजस्थान सरकार ने टीकाकरण का ऑडिट करवाने की घोषणा की है और इसके साथ ही सरकार ने दोहराया कि राज्य में टीकों का ‘वेस्टेज’ दो प्रतिशत से कम है।
सरकारी बयान के अनुसार राज्य में टीकाकरण के तहत अब तक 1 करोड़ 66 लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर राजस्थान देशभर में अग्रणी है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में टीकों का ‘वेस्टेज’ दो प्रतिशत से कम है जो केंद्र द्वारा अनुमत सीमा 10 प्रतिशत तथा टीका वेस्टेज के राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत से बेहद कम है।
प्रमुख शासन सचिव एवं स्वास्थ्य अखिल अरोड़ा ने बताया कि कुछ स्थानों पर टीकों की बर्बादी के संबंध में समाचार प्रकाशित हुए हैं। प्रारंभिक जांच में इस प्रकार टीकों की बर्बादी कहीं भी नहीं पाई गई।
उन्होंने बताया कि इसके बावजूद हाईलाइट किए गए स्थानों की जिला कलेक्टर के माध्यम से विशेष रूप से टीका ऑडिट करवाने के निर्देश दिए गए हैं और प्रदेश के सभी जिलों में इस संबंध में जारी दिशा निर्देश की अनुपालना भी सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है।
उन्होंने बताया कि टीकाकरण केंद्र का सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ एवं जिला कलक्टर द्वारा नामित प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे और इनके अतिरिक्त राज्य के स्वास्थ्य मुख्यालय से वरिष्ठ चिकित्सकों के दल भिजवाकर कोरोना के संबंध में समय समय पर ऑडिट भी करवाई जाएगी।
कुछ मीडिया खबरों के बाद भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
पृथ्वी

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देश की खबरें | उत्तर प्रदेश में कोरोना पीड़ितों की मदद में अभियान तेज करेगी भाजपा

लखनऊ, 31 मई उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने ‘सेवा ही संगठन अभियान’ को और तेज करने का फैसला किया है। इस कड़ी में भाजपा कार्यकर्ता कोरोना संक्रमण के कारण प्रभावित हुए लोगों के घरों पर पहुंचकर आवश्यकतानुसार उनकी सहायता के साथ-साथ टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक करेंगे।
सोमवार को भाजपा मुख्यालय में संगठन की एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक में यह फैसला किया गया जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, भाजपा उपाध्यक्ष और उत्‍तर प्रदेश के संगठन प्रभारी राधा मोहन सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल समेत कई प्रमुख पदाधिकारी व क्षेत्रीय अध्यक्ष मौजूद थे।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष सोमवार को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी लखनऊ पहुंचे हैं।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी की ओर से जारी बयान के अनुसार बी एल संतोष ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में कोरोना से बचाव और रोकथाम को लेकर ‘सेवा ही संगठन’ के तहत किये जा रहे कार्यों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सात वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश में किये गए सेवा कार्यो की जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिया।
संतोष ने कहा कि भाजपा द्वारा चलाये जा रहे ‘सेवा ही संगठन‘ अभियान के अन्तर्गत पार्टी कार्यकर्ता विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य के माध्यम से कोरोना से प्रभावित जनता की सहायता के लिए तत्पर होकर कार्य करें और लोगों को इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक करे।
उन्होंने निर्देश दिया कि भाजपा कार्यकर्ता कोरोना संक्रमण के कारण प्रभावित हुए लोगों के घरों पर पहुंचकर उनसे संपर्क करने के साथ-साथ आवश्यकतानुसार उनकी सहायता का भी प्रयास करें ।

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देश की खबरें | केंद्र ने पश्चिम बंगाल के ‘अब सेवानिवृत’ मुख्य सचिव को मंगलवार को दिल्ली बुलाया, स्मरण पत्र भेजा

नयी दिल्ली, 31 मई केंद्र ने सोमवार को ‘सेवानिवृत’ हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को मंगलवार को पूर्वाह्न दस बजे कार्मिक मंत्रालय में रिपोर्ट करने के लिए स्मरण पत्र भेजा है और ऐसा नहीं करने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह स्मरण पत्र तब भेजा गया जब बंदोपाध्याय मंत्रालय के पिछले आदेश पर सोमवार को यहां नहीं पहुंचे।
इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंदोपाध्याय ‘सेवानिवृत’ हो गए हैं और उन्हें तीन साल के लिए उनका सलाहाकार नियुक्त किया गया है।
दिन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मुख्य सचिव को बुलाने के केंद्र के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया और कहा कि उनकी सरकार शीर्ष नौकरशाह को कार्यमुक्त नहीं कर रही है।
ममता ने कहा कि केंद्र ने उन्हें मंगलवार को नॉर्थ ब्लॉक आने के लिए कहा है, लेकिन कोई अधिकारी राज्य प्रशासन की अनुमति के बिना किसी नए कार्यालय में नहीं जा सकता।
दिल्ली में सूत्रों ने बताया कि यदि बंदोपाध्याय मंगलवार को दिल्ली रिपोर्ट नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध जरूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘‘ उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है और यह सफाई मांगी जा सकती है कि वह दिल्ली में केंद्र की सेवा में क्यों शामिल नहीं हुए?’’

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जरुरी जानकारी | सेबी ने विनसम यार्न्स, उसके एमडी पर 12 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

नयी दिल्ली, 31 मई पूंजी बाजार नियामक सेबी ने ग्लोबल डिपाजिटरी रिसीट (जीडीआर) जारी करने में हेरोफेरी के मामले में विनसम यार्न्स लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक पर कुल मिलाकर 12 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह जुर्माना मार्च- अप्रैल 2011 के दौरान की गई जांच पर लगाया गया है। जिसमें जीडीआर जारी करने में बाजार नियमों का उल्लंघन पाया गया। सेबी के जारी आदेश में यह कहा गया है।
कंपनी ने 29 मार्च 2011 में 1.32 लाख डालर (करीब 96 करोड़ रुपये) के जीडीआर जारी किये थे।
जांच में पाया गया कि विंटेज एफजैडई (अब अल्टा विस्टा इंटरनेशनल एफजैडई) एकमात्र कंपनी थी जिसे जीडीआर जारी किये गये। जीडीआर खरीदने के लिये विंटेज ने ईयूआरएएम बैंक से 1.32 करोड़ डालर का कर्ज लिया था।
इसमें पाया गया कि विनसम ने जीडीआर से प्राप्त राशि को विंटेज एफजैडई के कर्ज के समक्ष गारंटी के तौर पर रखा था। ईयूआरएएम बैंक के साथ विनसम ने इसके लिये समझौता किया था और समझौते पर विनसम के प्रबंध निदेशक मनीष बगरोडिया ने हस्ताक्षर किये थे।
कंपनी इस बारे में शेयर बाजारों को जरूरी सूचना नहीं दे पाई। कंपनी लेखा मानकों के अनुरूप अपना वित्तीय लेखा जोखा भी नहीं बना पाई।
इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न बाजार नियमों का उल्लंघन करने पर सेबी ने विनसम यार्न्स पर 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया। सेबी के शुक्रवार को पारित आदेश के मुताबिक एक करोड़ रुपये का जुर्माना बगरोडिया पर लगाया गया।
सेबी के सोमवार को पारित आदेश के मुताबिक नियामक ने पीएमसी के शेयरों में भ्रामक उपस्थिति और उसके दाम में हेराफेरी के लिये पीएमसी फिनकार्प, राज कुमार मोदी, प्रभात मैनेजमेंट सविर्सिज और आर आर पी मैनेजमेंट सविर्सिज – चार इकाइयों पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। राजकुमार मोदी पीएमसी के प्रबंध निदेशक हैं।

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देश की खबरें | झारखंड में पान मसाों की बिक्री पर प्रतिबंध एक साल के लिये बढाया गया

रांची, 31 मई झारखंड सरकार ने पान मसालों के विभिन्न ब्रांडों की जांच में मैग्नीशियम कार्बोनेट पाये जाने के बाद प्रदेश में रजनीगंधा, विमल, पान पराग समेत 11 पान मसालों के उत्पादन, भंडारण तथा बिक्री पर 12 महीने के लिए प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया है। एक प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी ।
सरकारी प्रवक्ता ने यहां बताया कि मुख्य सचिव सुखदेव सिंह की अध्यक्षता में आहूत उच्चस्तरीय बैठक में दिये गए निर्देश के आलोक में राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त अरुण कुमार सिंह ने 11 पान मसालों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को एक वर्ष के लिए आगे बढ़ा दिया है।
उन्होंने बताया कि इन पान मसालों में रजनीगंधा, विमल, शिखर, पान पराग, दिलरुबा, राजनिवास, सोहरत, मुसाफिर, मधु, बहार, पान पराग प्रीमियम आदि शामिल हैं ।
उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध विभिन्न जिलों से प्राप्त पान मसालों के नमूनों के जांच में मैग्नीशियम कार्बोनेट की मात्रा पाए जाने के कारण लगाई गई है। प्रवक्ता ने बताया कि मैग्निशियम कार्बोनेट से हृदय की बीमारी सहित विभिन्न
प्रकार की बीमारियां होती है।
पान मसाला के लिए फूड सेफ्टी एक्ट 2006 में दिए गए मानक के मुताबिक मैग्नीशियम कार्बोनेट मिलाया जाना प्रतिबंधित है। अतः जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
प्रवक्ता ने बताया कि इन पान मसालों को रखने, उनका उपयोग करने पर सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिये गये हैं।

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जरुरी जानकारी | ‘समाधान योजना को मंजूरी मिलने के बाद उसमें शाामिल नहीं रहे दावे निरस्त माने जाएंगे’

नयी दिल्ली, 31 मई राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कहा है कि कर्ज में डूबी किसी भी कंपनी के लिये समाधान योजना को मंजूरी मिल जाने के बाद जो दावे योजना का हिस्सा नहीं थे, वो निरस्त माने जाते हैं।
अपीलीय न्यायाधिकरण की चेन्नई पीठ ने कहा कि यह केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण सहित सभी सांविधिक निकायों के दावों पर भी लागू होता है।
न्यायाधिकरण ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति ऐसे दावे के संबंध में किसी भी प्रकार की कार्यवाही जारी रखने का हकदार नहीं होगा जो समाधान योजना का हिस्सा नहीं है।’’
पीठ के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल, 2021 को घनश्याम मिश्रा एंड संस के मामले में दिए गए एक फैसले में कहा है कि एक बार जब समाधान योजना को एनसीएलटी द्वारा विधिवत मंजूरी दे दी जाती है, तो सभी दावे समाप्त हो जाते हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि ऐसे सभी दावे, जो समाधान योजना का हिस्सा नहीं हैं, समाप्त हो जाएंगे। कोई भी व्यक्ति किसी दावे के संबंध में कोई कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने का हकदार नहीं होगा, जो समाधान योजना का हिस्सा नहीं है।
एनसीएलएटी ने कहा, ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित उपरोक्त कानून के आधार पर यह स्पष्ट है कि धारा 31 के तहत समाधान योजना के अनुमोदन के बाद जो भी दावे हैं, वे समाप्त हो जाते हैं। और वह केंद्र सरकार, किसी भी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण, गारंटर और अन्य हितधारकों सहित कर्मचारी, सदस्य तथा अन्य पक्षों पर लागू होते हैं।’’
अपीलीय न्यायाधिकरण का यह निर्देश कर्मचारी भविष्य निधि संगठन तेलंगाना के क्षेत्रीय आयुक्त की याचिका पर आया।
आयुक्त ने एनसीएलटी चेन्नई के एक आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि 20 जुलाई, 2020 को जीवीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की समाधान योजना को मंजूरी देते हुए न्यायाधिकरण ने कंपनी पर बकाया भविष्य निधि के एक बड़े हिस्से को माफ कर दिया था।
जीवीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ने अप्रैल 2014 से कर्मचारियों के अंशदान सहित बकाया/नुकसान/ब्याज के भुगतान में चूक की थी। जबकि कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से योगदान राशि को काट लिया गया था। अब तक का कुल ईपीएफ बकाया 2.84 करोड़ रुपये है।
हालांकि, जीवीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के समाधान पेशेवर ने सूचित किया था कि संभावित बोलीदाता के अधिग्रहण के समय 1.95 करोड़ के दावों का भुगतान स्वीकार किया जाएगा।
समाधान पेशेवर ने कहा था कि पहले से स्वीकृत दावे का समाधान योजना के तहत निपटारा किया जाएगा।
हालांकि, ईपीएफओ ने 2.84 करोड़ का दावा किया था और एनसीएलएटी में याचिका दायर की थी।

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जरुरी जानकारी | रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा उसके आभासी मुद्रा संबंधी सर्कुलर को निरस्त मानें

मुंबई, 31 मई रिजर्व बैंक ने सोमवार को बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और भुगतान प्रणाली भागीदारों से कहा है कि वह उसके अप्रैल 2018 में आभासी मुद्रा के बारे में जारी सर्कुलर को निरस्त समझें और ग्राहकों को संदेश में उसका उल्लेख नहीं करें।
इस सर्कुलर को बाद में उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था।
आरबीआई का यह ताजा आदेश तब जारी किया गया जब कुछ बैंकों और उसके नियमन के दायरे में आने वाली इकाइयों ने इस सकुर्लर का संदर्भ देते हुये अपने ग्राहकों को आभासी मुद्राओं में लेनदेन करने से आगाह किया।
रिजर्व बैंक ने यह सर्कुलर 6 अप्रैल 2018 को जारी किया था। इसमें कहा गया था कि उसके नियमन के दायरे में आने वाली इकाइयों को आभासी मुद्राओं से संबंधित किसी भी तरह की सेवायें देने से प्रतिबंधित किया जाता है। इनमें आभासी मुद्राओं की खरीद फरोख्त से संबंधित खातों में आने जाने वाली राशि संबंधी सेवाओं पर भी रोक लगाने को कहा गया था।
रिजर्व बैंक ने इस संबंध में सोमवार को कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों के जरिये उसके संज्ञान में आया है कि कुछ बैंक और नियमन इकाइयां अपने ग्राहकों को 6 अप्रैल 2018 को जारी सर्कुलर का संदर्भ देते हुये आभासी मुद्रा में लेनदेन से आगाह कर रहे हैं।
केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि इस सर्कुलर को 04 मार्च 2020 को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था। ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुये यह सर्कुलर उच्चतम न्यायालय के फैसले के दिन से वैध नहीं रह गया है, इसलिये इसका संदेशों में जिक्र अथवा संदर्भ नहीं दिया जाना चाहिये।’’
रिजर्व बैंक ने यह सर्कुलर सोमवार को सभी वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों, भुगतान बैंकों, लघु वित्त बैंकों, गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और भुगतान प्रणाली भागीदारों के नाम जारी किया। रिजर्व बैंक ने कहा, हालांकि, बैंक मानक संचालन नियमनों के तहत अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी), मनी लांड्रिंग रोधी, आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला (सीएफटी) और मनी लांड्रिग रोधी कानून के तहत नियमन में आने वाली इकाइयों के दायित्व के तहत ग्राहकों की जांच परख प्रक्रिया को जारी रख सकते हैं।

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